उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq jab ruh mein utarta hai

इश्क़ जब रूह में उतरता है

عشق جب روح میں اترتا ہے

शायर: Vinay Shukla Mangal3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ जब रूह में उतरता है
आदमी जीते जी ही मरता है

मैं जो उलझूँ तो हम को रहने दो
धागा सुलझे तो फिर बिखरता है

वक़्त के साथ हैं बदलते लोग
सच कहीं हारने से डरता है