उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab talak aab-o-dana lagta hai

जब तलक आब-ओ-दाना लगता है

جب تلک آب و دانہ لگتا ہے

शायर: Raakesh ulfat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब तलक आब-ओ-दाना लगता है
ये जहाँ आशियाना लगता है

ग़ुंचा ग़ुंचा खिला है फूलों सा
आप का मुस्कुराना लगता है

मेरी माँ का दिया हुआ रूमाल
धूप में शामियाना लगता है

आज लम्बे सफ़र पे चलते हैं
आज मौसम सुहाना लगता है

ऐसे बच्चों को कौन समझाए
घर जिन्हें क़ैद-ख़ाना लगता है

आप का दर्द दर्द है लेकिन
दूसरों का बहाना लगता है

तू वफ़ादार है तो फिर 'उल्फ़त'
क्यूँ बुरा आज़माना लगता है