उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab tak wo hai chhat par ye nazar us pe gaDi hai

जब तक वो है छत पर ये नज़र उस पे गड़ी है

جب تک وہ ہے چھت پر یہ نظر اس پہ گڑی ہے

शायर: Vikram Sharma4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब तक वो है छत पर ये नज़र उस पे गड़ी है
फिर चाँद को तकने के लिए रात पड़ी है

तन्हाई में इक शोर है धड़कन का मुसलसल
ये दिल है मिरा या कोई दीवार-घड़ी है

ता-'उम्र किसी के लिए कोई नहीं रुकता
तुम सोच लो ये फ़ैसला लेने की घड़ी है

कहने को कोई शे'र न करने को कोई बात
क्या कीजिए वो पहली दफ़'अ साथ खड़ी है