उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se tum aa gae fasane mein

जब से तुम आ गए फ़साने में

جب سے تم آ گئے فسانے میں

शायर: Qadeer Ayaz9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से तुम आ गए फ़साने में
तज़्किरा है मिरा ज़माने में

आँख दिल रूह मुंतज़िर है तिरी
देर क्यों हो रही है आने में

नूर-ओ-ख़ुशबू से घर हुआ मामूर
आ गए तुम ग़रीब-ख़ाने में

भूल जाओ कहा फ़क़त उस ने
उम्र लग जाएगी भुलाने में

बर्क़ तो दूर ही से चमकी थी
लग गई आग आशियाने में

एक अदना ख़ुशी भी मिल न सकी
क्या कमी थी तिरे ख़ज़ाने में

उन के ऐबों को जानता हूँ मगर
वो बड़े हैं मिरे घराने में

क़त्ल करते हैं छूट जाते हैं
खेल दौलत का है ज़माने में

उस ने देखा है मुस्कुरा के 'अयाज़'
तंज़ मख़्फ़ी है मुस्कुराने में