उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gumnam kya karoge chalo hum hi kho gae

गुमनाम क्या करोगे चलो हम ही खो गए

گمنام کیا کرو گے چلو ہم ہی کھو گئے

शायर: Qadeer Ayaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुमनाम क्या करोगे चलो हम ही खो गए
ओढ़े कफ़न वफ़ा का सुकूँ पा के सो गए

सन्नाटा होता आया है जिन की सदाओं पर
ख़ामोश करने वाले ही ख़ामोश हो गए

नज़रें तलाश करती हैं महफ़िल में अब उन्हें
महफ़िल को सूनी छोड़ के महफ़िल से जो गए

वालिद जो लौट आए तो खाने को लाएँगे
बच्चे इस इंतिज़ार में भूके ही सो गए

कैसे कहूँ 'अयाज़' ग़ज़ल किस तरह कही
हर लफ़्ज़ अपने ख़ून में हम तो डुबो गए