उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se na-danon ne KHud ko fani kahna chhoD diya

जब से नादानों ने ख़ुद को फ़ानी कहना छोड़ दिया

جب سے نادانوں نے خود کو فانی کہنا چھوڑ دیا

शायर: Nafas Ambalvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से नादानों ने ख़ुद को फ़ानी कहना छोड़ दिया
हम ने अपनी हैरत को हैरानी कहना छोड़ दिया

दरिया तेरी 'अज़्मत पर भी ये इल्ज़ाम तो आएगा
आख़िर प्यासे लोगों ने क्यों पानी कहना छोड़ दिया

सोचो कितनी मायूसी का मौसम है इस बस्ती में
लोगों ने बे-मा'नी को बे-मा'नी कहना छोड़ दिया

मेरा इन तूफ़ानों से तो बस इतना सा झगड़ा है
मैं ने तेज़ हवाओं को तूफ़ानी कहना छोड़ दिया

जिन की रा'नाई के पीछे सौ-सौ झूट की परतें हैं
हम ने ऐसे चेहरों को नूरानी कहना छोड़ दिया

माना उस ने सब्ज़ फ़ज़ाएँ सहरा सहरा कर डालीं
तुम ने क्यों वीरानी को वीरानी कहना छोड़ दिया

मेरे ग़म का शायद तुम को इस से कुछ अंदाज़ा हो
मैं ने उस की चूनर को अब धानी कहना छोड़ दिया