उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi koi kaam yaad aaya

जब कभी कोई काम याद आया

جب کبھی کوئی کام یاد آیا

शायर: Parveen Kaif7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी कोई काम याद आया
तब उन्हें मेरा नाम याद आया

जब ये सोचा कि उन से थी पहचान
दूर ही का सलाम याद आया

फिर नशेमन की अबतरी देखी
फिर क़फ़स का निज़ाम याद आया

फिर वो शब वो सुकूत का आलम
फिर ख़ुदा का कलाम याद आया

आज उन्हें देख कर मोहब्बत का
क़िस्सा-ए-ना-तमाम याद आया

हाए माज़ी के ख़ैरियत नामे
जाने किस किस का नाम याद आया

बन में देखा जो वहशियों का हुजूम
शहर का इज़्दिहाम याद आया