उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab kabhi bolna waqt par bolna

जब कभी बोलना वक़्त पर बोलना

جب کبھی بولنا وقت پر بولنا

शायर: Tahir Faraz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब कभी बोलना वक़्त पर बोलना
मुद्दतों सोचना मुख़्तसर बोलना

डाल देगा हलाकत में इक दिन तुझे
ऐ परिंदे तिरा शाख़ पर बोलना

पहले कुछ दूर तक साथ चल के परख
फिर मुझे हम-सफ़र हम-सफ़र बोलना

उम्र-भर को मुझे बे-सदा कर गया
तेरा इक बार मुँह फेर कर बोलना

मेरी ख़ाना-बदोशी से पूछे कोई
कितना मुश्किल है रस्ते को घर बोलना

उम्र-भर तुझ को रक्खेगा गर्म-ए-सफ़र
मंज़िलों को तिरा रहगुज़र बोलना

क्यों है ख़ामोश सोने की चिड़िया बता
लग गई तुझ को किस की नज़र बोल ना