उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab jab ana ke hath mein patwar aa gai

जब जब अना के हाथ में पतवार आ गई

جب جب انا کے ہاتھ میں پتوار آ گئی

शायर: Raakesh ulfat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब जब अना के हाथ में पतवार आ गई
कश्ती डुबोने वाली कोई धार आ गई

चेहरों पे इक अजीब सी लशकार आ गई
जैसे ही एक हाथ में अख़बार आ गई

झगड़ा तो अहमक़ों में हुआ था मगर ये क्या
दानिशवरों के दरमियाँ दीवार आ गई

कुछ ज़िम्मेदारियों से मिरा ढीला-पन गया
कुछ अपने आप गर्मी-ए-रफ़्तार आ गई

नफ़रत का एक नारा लगा था हुजूम में
फिर हर किसी के हाथ में तलवार आ गई

मर तो नहीं गया है कहीं आप का ज़मीर
कैसे किसी के पाँव पे दस्तार आ गई

पहले हमारा बोलना कैसा था छोड़िए
उर्दू ज़बान सीख ली गुफ़्तार आ गई