उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab dil ko iztirab ke nalon ne aa liya

जब दिल को इज़्तिराब के नालों ने आ लिया

جب دل کو اضطراب کے نالوں نے آ لیا

शायर: Omaima Yusuf5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब दिल को इज़्तिराब के नालों ने आ लिया
हौले से हम ने नाम तिरा गुनगुना लिया

खिलते हुए गुलों की महक राएगाँ गई
मुझ को तिरे हिसार की ख़ुशबू ने आ लिया

जिस तरह गुल ने आँधियाँ झेली हैं रात-भर
हम ने भी ग़म की थाप से ठट्ठा बना लिया

हम को ग़म-ए-जहाँ में जिधर तक रसाई थी
तेरी हसीन आँख का नक़्शा बना लिया

कोई ग़ज़ल कही कभी तेरे जमाल पर
तेरी हँसी की याद में ख़ुद को हँसा लिया