उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab yahi surat-e-didar bana lete hain

अब यही सूरत-ए-दीदार बना लेते हैं

اب یہی صورت دیدار بنا لیتے ہیں

शायर: Omaima Yusuf6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब यही सूरत-ए-दीदार बना लेते हैं
उन से मिलने का हसीं ख़्वाब सजा लेते हैं

हम वही लोग थे हर बात पे रोने वाले
हम जो अश्कों को भी अब राज़ बना लेते हैं

हम हैं बे-रहमी-ए-हालात से वाक़िफ़ फिर भी
आँख में रोज़ नए ख़्वाब सजा लेते हैं

शहर-ए-जानाँ के सभी लोग हैं दुश्मन मेरे
देख लेने को भी अफ़्साना बना लेते हैं

कासा-ए-चश्म को ख़ैरात में आँसू दे कर
दिल से ये बोझ उदासी का हटा लेते हैं

ज़िंदगी देखते रहते हैं तुझे हैरत से
और दीवार से बस सर को टिका लेते हैं