उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek mohabbat be-dili ke kaam aai

इक मोहब्बत बे-दिली के काम आई

اک محبت بے دلی کے کام آئی

शायर: Omaima Yusuf5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक मोहब्बत बे-दिली के काम आई
बे-दिली में फिर सुख़न की शाम आई

तज़्किरा क्यूँकर करेंगे हम ख़ुशी का
शाइ'रों को जब उदासी काम आई

अपने मतलब की सभी ने बाँट ली थी
बात जितनी जिस किसी के काम आई

मुझ सिवा सब को पुकारा नाम ले कर
मेरे हिस्से की सदा बे-नाम आई

हम मोहब्बत का वली कहते हैं उस को
जिस के हिस्से क़ुर्बतों की शाम आई