उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bhi karti thi wo nadi baaten

जब भी करती थी वो नदी बातें

جب بھی کرتی تھی وہ ندی باتیں

शायर: Vikram Sharma9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब भी करती थी वो नदी बातें
करती थी सिर्फ़ प्यास की बातें

हम कि चेहरे तो भूल जाते हैं
याद रह जाती हैं कई बातें

डूबने वाले इस भरम में थे
करती होंगी ये जल-परी बातें

फूल देखें तो याद आती हैं
आप की ख़ुशबुओं भरी बातें

'इश्क़ में इतना डर तो रहता है
खुल न जाएँ ये आपसी बातें

हो न पाया कभी ये दिल हल्का
लद गईं दिल पे बोझ सी बातें

बीती बातों पे ऐसे शे'र कहो
शे'र से निकलें कुछ नई बातें

आप की चुप तो जान-लेवा है
मुझ से कहिये भली बुरी बातें

मुद्दतों बा'द हम मिले उन से
और फिर देर तक हुई बातें