उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane ye kaisa zahr dilon mein utar gaya

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया

جانے یہ کیسا زہر دلوں میں اتر گیا

शायर: Ummeed Fazli5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया
परछाईं ज़िंदा रह गई इंसान मर गया

बर्बादियाँ तो मेरा मुक़द्दर ही थीं मगर
चेहरों से दोस्तों के मुलम्मा उतर गया

ऐ दोपहर की धूप बता क्या जवाब दूँ
दीवार पूछती है कि साया किधर गया

इस शहर में फ़राश-तलब है हर एक राह
वो ख़ुश-नसीब था जो सलीक़े से मर गया

क्या क्या न उस को ज़ोम-ए-मसीहाई था 'उमीद'
हम ने दिखाए ज़ख़्म तो चेहरा उतर गया