उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jam-e-mai-e-alast se sarshaar ho gae

जाम-ए-मय-ए-अलस्त से सरशार हो गए

جام مئے الست سے سرشار ہو گئے

शायर: Maharaja Sir Kishan Parashad Shad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाम-ए-मय-ए-अलस्त से सरशार हो गए
या'नी रहीन-ए-ख़ाना-ए-ख़म्मार हो गए

मदहोश हो के होश में आना ग़ज़ब हुआ
दुनिया के कारोबार से बेकार हो गए

या-रब हमारी दाद की अच्छी दवा मिली
हम ख़्वाहिश-ए-तबीब में बीमार हो गए

दिल में हवा-ए-गैसू-ए-दिलदार क्या बसी
बैठे-बिठाए मुफ़्त गिरफ़्तार हो गए

इन लन-तरानियों से तिरी आज सैकड़ों
मूसा की तरह तालिब-ए-दीदार हो गए

ले कर अज़ीज़-ए-मिस्र वो बाज़ार-ए-इश्क़ में
क्या ख़ूब अपने आप ख़रीदार हो गए

काफ़िर हुए हैं 'शाद' हम उस बुत के वास्ते
शुक्र-ए-ख़ुदा कि साहिब-ए-ज़ुन्नार हो गए