उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaDon bhar kyon mere aangan mein saya tha

जाड़ों भर क्यों मेरे आँगन में साया था

جاڑوں بھر کیوں میرے آنگن میں سایہ تھا

शायर: Rafia Shabnam Abidi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाड़ों भर क्यों मेरे आँगन में साया था
सूरज ने किस छत पर ख़ेमा लगवाया था

इक पत्थर था जो माथे से टकराया था
फेंकने वाला शायद मेरा माँ जाया था

फूल को कब थी सैर की और तफ़रीह की ख़्वाहिश
शोख़ हवा ही ने ये रस्ता दिखलाया था

तोतों और चिड़ियों को अब क्यों ढूँड रहे हो
नीम का पेड़ तो ख़ुद तुम ने ही कटवाया था

जीवन क्या था ताश के पत्तों की बाज़ी थी
शाह मगर कब मेरे हिस्से में आया था

चारों क़ुल इक सूरा-ए-फ़ील इक सूरा-ए-कौसर
उस दिन हम ने यही वज़ीफ़ा दोहराया था

राख के ढेर पे रक़्स-कुनाँ था वो इक वहशी
वही कि जिस ने सारे शहर को जलवाया था

एक क़लम कुछ कोरे काग़ज़ और कुछ सोचें
ले दे के बस यही तो मेरा सरमाया था

इक 'शबनम' थी जो महफ़ूज़ थी ख़ेमा-ए-गुल में
पत्ती पत्ती को सूरज ने बहकाया था