उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq ne aql ko diwana bana rakkha hai

इश्क़ ने अक़्ल को दीवाना बना रक्खा है

عشق نے عقل کو دیوانہ بنا رکھا ہے

शायर: Hafeez Jalandhari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ ने अक़्ल को दीवाना बना रक्खा है
ज़ुल्फ़-ए-अंजाम की उलझन में फँसा रक्खा है

उठ के बालीं से मिरे दफ़्न की तदबीर करो
नब्ज़ क्या देखते हो नब्ज़ में क्या रक्खा है

मेरी क़िस्मत के नविश्ते को मिटा दे कोई
मुझ को क़िस्मत के नविश्ते ने मिटा रक्खा है

आप बेताब-ए-नुमाइश न करें जल्वों को
हम ने दीदार क़यामत पे उठा रक्खा है

वो न आए न सही मौत तो आएगी 'हफ़ीज़'
सब्र कर सब्र तिरा काम हुआ रक्खा है