उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq mein iztirab ki duniya

'इश्क़ में इज़्तिराब की दुनिया

عشق میں اضطراب کی دنیا

शायर: Raft Bahraichi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'इश्क़ में इज़्तिराब की दुनिया
दूसरी है 'अज़ाब की दुनिया

एक मा'ना में दोनों हैं मौसूम
मेरी दुनिया हबाब की दुनिया

उसे चाहा अज़ल से चाहा जिसे
मर्हबा इंतिख़ाब की दुनिया

शान मुझ को दिखाता है महशर
अल-मदद इज़्तिराब की दुनिया

बढ़ गए जब हुदूद-ए-हस्ती से
उठ गई ख़ुद हिजाब की दुनिया

'इश्क़ में जब वफ़ा पे बात आई
बन गया दिल जवाब की दुनिया

इस करम पर भी तुम से बन न सकी
किसी ख़ाना-ख़राब की दुनिया

कौन शय में नहीं वो जल्वा-पज़ीर
है रिवाजन हिजाब की दुनिया

आने दो वक़्त-ए-पुर्सिश-ए-आ'माल
चश्म-ए-तर है जवाब की दुनिया

देख 'राफ़त' तू अपना मुस्तक़बिल
ता-ब-कै ये शबाब की दुनिया