उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle meri KHwahish mujhe ruswa kar de

इस से पहले मिरी ख़्वाहिश मुझे रुस्वा कर दे

اس سے پہلے مری خواہش مجھے رسوا کر دے

शायर: Aalam Nizami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले मिरी ख़्वाहिश मुझे रुस्वा कर दे
इज़्ज़त-ए-नफ़्स को ख़ालिक़ मिरे ज़िंदा कर दे

मुझ से दुनिया की ये हालत नहीं देखी जाती
मेरे मालिक मेरे एहसास को अंधा कर दे

देख अच्छा नहीं अहबाब की ग़ीबत करना
ये अमल तुझ को किसी रोज़ न तन्हा कर दे

आ न जाए कहीं लहजे में तकब्बुर या-रब
मेरे बढ़ते हुए क़द को ज़रा छोटा कर दे

शादमानी में तिरी याद नहीं आती है
कोई ग़म मुझ को अता मेरे मसीहा कर दे