उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is liye to bujha nahin hun main

इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं

اس لئے تو بجھا نہیں ہوں میں

शायर: Aalam Nizami8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस लिए तो बुझा नहीं हूँ मैं
बुझने वाला दिया नहीं हूँ मैं

जो भी है सब मिरा मुक़द्दर है
ज़िंदगी से ख़फ़ा नहीं हूँ मैं

मेरी ता'ज़ीम क्यों करे दुनिया
आदमी हूँ ख़ुदा नहीं हूँ मैं

आंधियों साँस चल रही है अभी
जल रहा हूँ बुझा नहीं हूँ मैं

बस ज़रा तल्ख़ियाँ मिज़ाज में हैं
दोस्तो सर-फिरा नहीं हूँ मैं

लोग जितना बुरा बताते हैं
यार उतना बुरा नहीं हूँ मैं

मुस्तरद कर दे जिस को ये दुनिया
वो ग़लत फ़ैसला नहीं हूँ मैं

मुझ को अपनी तलाश है 'आलम'
ख़ुद से अब तक मिला नहीं हूँ मैं