उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn ne sikhin gharib-azariyan

हुस्न ने सीखीं ग़रीब-आज़ारियाँ

حسن نے سیکھیں غریب آزاریاں

शायर: Hafeez Jalandhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न ने सीखीं ग़रीब-आज़ारियाँ
इश्क़ की मजबूरियाँ लाचारियाँ

बह गया दिल हसरतों के ख़ून में
ले गईं बीमार को बीमारियाँ

सोच कर ग़म दीजिए ऐसा न हो
आप को करनी पड़ें ग़म-ख़्वारियाँ

दार के क़दमों में भी पहुँची न अक़्ल
इश्क़ ही के सर रहीं सरदारियाँ

इक तरफ़ जिंस-ए-वफ़ा क़ीमत-तबल
इक तरफ़ मैं और मिरी नादारियाँ

होते होते जान दूभर हो गई
बढ़ते बढ़ते बढ़ गईं बे-ज़ारियाँ

तुम ने दुनिया ही बदल डाली मिरी
अब तो रहने दो ये दुनिया-दारियाँ