उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijr ka chand dard ki naddi

हिज्र का चाँद दर्द की नद्दी

ہجر کا چاند درد کی ندی

शायर: M Kothiyavi Rahi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिज्र का चाँद दर्द की नद्दी
यही सूरत है अपनी दुनिया की

रेगज़ारों में संग खिलते हैं
जैसे बाग़ों में शाख़ शाख़ कली

मेरा घर है कि 'मीर'-साहिब का
उफ़ ये होंटों पे तल्ख़ तल्ख़ हँसी

आ गया मौसम-ए-ज़मिस्ताँ क्या
आग की जुस्तुजू में रात कटी

कू-ब-कू दर-ब-दर भटकते हुए
देख ली आज मौत की भी गली

क़ुफ़्ल होंटों का टूट कर ही रहा
दिल-ए-अफ़सुर्दा रात बीत चली

एक चलती हुई ग़ज़ल पर रात
'राही'-ए-ग़म-ज़दा ने नज़्म कही