उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hazar ranj sahi is qadar udas na ho

हज़ार रंज सही इस क़दर उदास न हो

ہزار رنج سہی اس قدر اداس نہ ہو

शायर: Vikram Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हज़ार रंज सही इस क़दर उदास न हो
उदास होने लगे बाम-ओ-दर उदास न हो

किसी दरख़्त के साए में वो नहीं बैठे
उदास लोगों ने सोचा शजर उदास न हो

उदासी जैसे कि उस के बदन का हिस्सा है
अधूरा लगता है वो शख़्स अगर उदास न हो

शिकस्ता दिल को डुबो देगा आँख का पानी
ऐ हम-सफ़र तू मिरी नाव पर उदास न हो

कई मरज़ तो फ़क़त इस लिए छुपाए थे
मुझे ये डर था मिरा चारागर उदास न हो