उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haya to us se sharmati bahut hai

हया तो उस से शरमाती बहुत है

حیا تو اس سے شرماتی بہت ہے

शायर: Parveen Kaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हया तो उस से शरमाती बहुत है
पड़ोसन मेरी इतराती बहुत है

वो घर में चैन से रहती है कम-कम
मगर छत पर नज़र आती बहुत है

नहीं सुनती किसी की अपने आगे
समझती कम है समझाती बहुत है

करे है गुफ़्तुगू सरगोशियों में
मगर ज़ेवर तो खनकाती बहुत है

बड़ी संजीदा बनती है वो लेकिन
मियाँ से छुप के मस्तानी बहुत है

मिरे अल्लाह उस की गोद भर दे
वो तन्हा लोरियाँ गाती बहुत है