उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa mein phirte ho kya hirs aur hawa ke liye

हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए

ہوا میں پھرتے ہو کیا حرص اور ہوا کے لیے

शायर: Bahadur Shah Zafar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा में फिरते हो क्या हिर्स और हवा के लिए
ग़ुरूर छोड़ दो ऐ ग़ाफ़िलो ख़ुदा के लिए

गिरा दिया है हमें किस ने चाह-ए-उल्फ़त में
हम आप डूबे किसी अपने आश्ना के लिए

जहाँ में चाहिए ऐवान ओ क़स्र शाहों को
ये एक गुम्बद-ए-गर्दूं है बस गदा के लिए

वो आईना है कि जिस को है हाजत-ए-सीमाब
इक इज़्तिराब है काफ़ी दिल-ए-सफ़ा के लिए

तपिश से दिल का हो क्या जाने सीने में क्या हाल
जो तेरे तीर का रौज़न न हो हवा के लिए

तबीब-ए-इश्क़ की दुक्काँ में ढूँडते फिरते
ये दर्दमंद-ए-मोहब्बत तिरी दवा के लिए

जो हाथ आए 'ज़फ़र' ख़ाक-पा-ए-'फ़ख़रूद्दीन'
तो मैं रखूँ उसे आँखों के तूतिया के लिए