उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa jab na-munasib ho to patte TuT jate hain

हवा जब ना-मुनासिब हो तो पत्ते टूट जाते हैं

ہوا جب نا مناسب ہو تو پتے ٹوٹ جاتے ہیں

शायर: Naeem Waqif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा जब ना-मुनासिब हो तो पत्ते टूट जाते हैं
जहाँ मतलब-परस्ती हो वो रिश्ते टूट जाते हैं

गुलों की परवरिश के वास्ते माली ज़रूरी है
न हो माँ-बाप का साया तो बच्चे टूट जाते हैं

अगर हो जाए बेटा ना-ख़लफ़ तो बूढ़ी आँखों के
सजे होते हैं जितने भी वो सपने टूट जाते हैं

परिंदे हैं अगर ख़ामोश बुज़दिल मत समझ सय्याद
अगर ये ज़िद पे आ जाएँ तो पिंजरे टूट जाते हैं

दुखा दे जो दिलों को बात ऐसी मत करो 'वाक़िफ़'
ज़रा सी ठेस लगने से ये शीशे टूट जाते हैं