उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humse ye qatl ke manzar nahin dekhe jate

हम से ये क़त्ल के मंज़र नहीं देखे जाते

ہم سے یہ قتل کے منظر نہیں دیکھے جاتے

शायर: Naeem Waqif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम से ये क़त्ल के मंज़र नहीं देखे जाते
शाह-राहों पे कटे सर नहीं देखे जाते

जब कफ़न बाँध के निकले हो शहादत के लिए
फिर पलट कर तो कभी घर नहीं देखे जाते

फ़िक्र का काश दरीचा ही कोई खुल जाए
ज़ेह्न इंसानों के बंजर नहीं देखे जाते

हम ने हँसते हुए फूलों में गुज़ारी है हयात
हम से बर्बादी के मंज़र नहीं देखे जाते

देख लेने से भी होती है तसल्ली दिल को
आइने हाथ से छू कर नहीं देखे जाते

ग़म की राहों से भी हँसते हुए गुज़रो 'वाक़िफ़'
राह में ख़ार या पत्थर नहीं देखे जाते