उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haiwaniyat ka zahr dilon mein utar gaya

हैवानियत का ज़हर दिलों में उतर गया

حیوانیت کا زہر دلوں میں اتر گیا

शायर: Naeem Waqif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैवानियत का ज़हर दिलों में उतर गया
बस्ती से अपनी कौन सा मौसम गुज़र गया

ऊँचे मकान वाले जो थे साफ़ बच गए
इल्ज़ाम-ए-क़त्ल सारा ग़रीबों के सर गया

दीदार हो रहा था मुझे उन का ख़्वाब में
आँखें खुलीं तो ख़ुशनुमा मंज़र बिखर गया

हैरत-ज़दा हैं लोग मिरा 'अज़्म देख कर
मैं पेच-ओ-ख़म की राह पे चल कर सँवर गया

ज़ातें तमाम फ़िरक़ा-परस्ती में बट गईं
'वाक़िफ़' तलाश करता है इंसाँ किधर गया