उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasraten KHamosh hain ujDe mazaron ki tarah

हसरतें ख़ामोश हैं उजड़े मज़ारों की तरह

حسرتیں خاموش ہیں اجڑے مزاروں کی طرح

शायर: Balbir Rathi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हसरतें ख़ामोश हैं उजड़े मज़ारों की तरह
वलवले रौशन हैं क्यों फिर भी शरारों की तरह

कुछ न कुछ तो है दिल-ए-वहशी तिरी आवाज़ में
वर्ना वो कब देखते थे बे-क़रारों की तरह

कहकशाओं पर बहकते जा रहे हैं आज हम
मस्तियाँ बिखरी हैं राहों में सितारों की तरह

ये किसी की ज़ुल्फ़ बिखरी है कि बादल छाए हैं
बर्क़ लहराती है आँचल के किनारों की तरह

रफ़्ता-रफ़्ता इक क़यामत बन गया उन का शबाब
वो निखरते ही गए रंगीं नज़ारों की तरह

जाम-ए-ग़म पीते बहकते लड़खड़ाते झूमते
ज़िंदगी का लुत्फ़ लेंगे बादा-ख़्वारों की तरह