उर्दू शायरी · ग़ज़ल

harif-e-raaz hain ai be-KHabar dar-o-diwar

हरीफ़-ए-राज़ हैं ऐ बे-ख़बर दर-ओ-दीवार

حریف راز ہیں اے بے خبر در و دیوار

शायर: Zaheer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हरीफ़-ए-राज़ हैं ऐ बे-ख़बर दर-ओ-दीवार
कि गोश रखते हैं सब सर-ब-सर दर-ओ-दीवार

नवेद-ए-मक़दम-ए-फ़स्ल-ए-बहार सुन सुन कर
उड़ेंगे शौक़ में बे-बाल-ओ-पर दर-ओ-दीवार

शब-ए-फ़िराक़ में घर मुझ को काटे खाता है
बना है इक सग-ए-दीवाना हर दर-ओ-दीवार

तुम्हारे ग़म ने वो सूरत मिरी बनाई है
कि रो रहे हैं मिरे हाल पर दर-ओ-दीवार

हुजूम-ए-रंज-ओ-क़लक़ में 'ज़हीर' क्या कहिए
नहीं हैं मूनिस-ए-ख़ल्वत मगर दर-ओ-दीवार