उर्दू शायरी · ग़ज़ल

harf-e-tadbir na tha harf-e-dilasa raushan

हर्फ़-ए-तदबीर न था हर्फ़-ए-दिलासा रौशन

حرف تدبیر نہ تھا حرف دلاسہ روشن

शायर: Zafar Moradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर्फ़-ए-तदबीर न था हर्फ़-ए-दिलासा रौशन
मैं जो डूबा तो हुआ साहिल-ए-दरिया रौशन

अहद में अपने मुसल्लत है अंधेरों का अज़ाब
ताक़ में वक़्त के रख दो कोई लम्हा रौशन

यूसुफ़-आसा सर-ए-बाज़ार हैं रुस्वा लेकिन
वादी-ए-इश्क़ में है अज़्म-ए-ज़ुलेख़ा रौशन

जो मिरी माँ ने दिया रख़्त-ए-सफ़र की सूरत
मेरे माथे पे अभी तक है वो बोसा रौशन

तीर अंधेरों के मुझे ज़द में लिए बैठे हैं
जैसे इस बज़्म में हूँ मैं ही अकेला रौशन

ऐन मुमकिन है पिघल जाएँ अँधेरे दिल के
ऐ 'ज़फ़र' ऐसे में हो गर कोई नग़्मा रौशन