उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har shuur-o-fikr-e-na-dida pas-e-diwar-e-harf

हर शुऊर-ओ-फ़िक्र-ए-नादीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

ہر شعور و فکر نا دیدہ پس دیوار حرف

शायर: Zafar Moradabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर शुऊर-ओ-फ़िक्र-ए-नादीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़
हैं नए मफ़्हूम पोशीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

हैं ग़ज़ल-सूरत बहुत यूँ तो चमकते आइने
मा'नवी पैकर हैं बोसीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

जिस्म के ज़ख़्मों को गर दिलकश क़बा से ढक लिया
रूह के हैं ज़ख़्म दुज़्दीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

ख़ुश्क चट्टानों की सूरत ईस्तादा थे जो लोग
अक्सर उन में भी थे नम-दीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

हैं फ़राज़-ए-हर्फ़ पर भी उस की 'अज़्मत के निशाँ
सतवत-ए-ग़ालिब है पोशीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़

फ़ख़्र है जिन को ख़ुद अपनी ख़ुश-बयानी पर 'ज़फ़र'
है ज़बाँ उन की भी लग़ज़ीदा पस-ए-दीवार-ए-हर्फ़