उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har KHushi maqbaron pe likh di hai

हर ख़ुशी मक़बरों पे लिख दी है

ہر خوشی مقبروں پہ لکھ دی ہے

शायर: Qamar Iqbal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर ख़ुशी मक़बरों पे लिख दी है
और उदासी घरों पे लिख दी है

एक आयत सी दस्त-ए-क़ुदरत ने
तितलियों के परों पे लिख दी है

जालियों को तराश कर किस ने
हर दुआ पत्थरों पे लिख दी है

लोग यूँ सर छुपाए फिरते हैं
जैसे क़ीमत सरों पे लिख दी है

हर वरक़ पर हैं कितने रंग 'क़मर'
हर ग़ज़ल मंज़रों पे लिख दी है