उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hanste hue lamhat ka dil Dub raha hai

हँसते हुए लम्हात का दिल डूब रहा है

ہنستے ہوے لمحات کا دل ڈوب رہا ہے

शायर: Jaleel 'Aali'6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हँसते हुए लम्हात का दिल डूब रहा है
ये सिलसिला जैसे मिरे पहलू से चला है

जाना है मुझे भी उसी मंज़िल पे ज़माने
लेकिन मिरा रस्ता तिरे रस्ते से जुदा है

रफ़्तार में ऐसी भी कहाँ सुस्त-रवी थी
पीछे था जो मीलों वो मुझे आन मिला है

बरसा न किसी सम्त से खुल कर कोई बादल
इक हब्स सा मौसम में ब-दस्तूर जो था है

जाना तो था औरों की तरह उस को भी इक रोज़
इस बात का ग़म है कि वो बे-वक़्त गया है

कुछ देर हुई रौशनी लेकिन किसे मा'लूम
टूटा था जो तारा वो कहाँ जा के गिरा है