उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein to gosha-nashin aur jahan bhi hona hai

हमें तो गोशा-नशीं और जहाँ भी होना है

ہمیں تو گوشہ نشیں اور جہاں بھی ہونا ہے

शायर: Obaidur Rahman5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें तो गोशा-नशीं और जहाँ भी होना है
यहाँ भी होना है हम को वहाँ भी होना है

निशान भी है लगाना निशाँ भी होना है
मकाँ में रहते हुए ला-मकाँ भी होना है

इस एहतियात से करना है ज़िंदगी अपनी
अकेला चलना है और कारवाँ भी होना है

ज़मीं में रखते हैं पैवस्त अपनी दुनिया को
ज़मीं पे रहते हुए आसमाँ भी होना है

इक ऐसी क़ैद भी अब ख़ुद पे यूँ लगानी है
ज़बान रखते हुए बे-ज़बाँ भी होना है