उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamein KHabar hai wo kyon humse ab nahin milta

हमें ख़बर है वो क्यों हम से अब नहीं मिलता

ہمیں خبر ہے وہ کیوں ہم سے اب نہیں ملتا

शायर: Aalam Nizami6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमें ख़बर है वो क्यों हम से अब नहीं मिलता
यहाँ किसी से कोई बे-सबब नहीं मिलता

फिर आफ़्ताब कहाँ अपनी रौशनी बाँटे
नए चराग़ों में हुस्न-ए-तलब नहीं मिलता

बता रही हैं अदीबों के घर की तहज़ीबें
विरासतों में सभी को अदब नहीं मिलता

मैं जलने लगता हूँ तन्हाइयों के दोज़ख़ में
कभी वो मेरी ज़रूरत पे जब नहीं मिलता

उदास मत हो जो हासिल न कर सका उस को
कभी किसी को ज़माने में सब नहीं मिलता

है ज़ात आप की तख़्लीक़-ए-दो-जहाँ का सबब
न मिलते आप हमें हम को रब नहीं मिलता