उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamare hote hote rah gae hain

हमारे होते होते रह गए हैं

ہمارے ہوتے ہوتے رہ گئے ہیں

शायर: Idris Azad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारे होते होते रह गए हैं
क़सम से आप अच्छे रह गए हैं

हमारे पास आ बैठे थे यूँही
हमारे पास बैठे रह गए हैं

तुम्हारे पास मेरे कुछ फ़साने
वहीं सोफ़े पे रक्खे रह गए हैं

ये तेरी कुदा-कारी थी कि दिल पे
तिरे अल्फ़ाज़ लिक्खे रह गए हैं

मिरे खेतों से चिड़ियाँ उड़ गई हैं
मिरे खेतों में कीड़े रह गए हैं

बहुत जी चाहता था लौट जाएँ
तिरी आँखों के सदक़े रह गए हैं

किसे चाहें तो फिर ये इश्क़ होगा
हम उस मकतब में बच्चे रह गए हैं

मैं हफ़्त-अफ़्लाक से आगे खड़ा हूँ
मिरे घर-बार पीछे रह गए हैं

वो सब आँखें चुरा कर ले गया है
हसीं बनते सँवरते रह गए हैं

बहुत सीखे हैं मरने के तरीक़े
सलीक़े ज़िंदगी के रह गए हैं