उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum wasl ki din-raat dua mang rahe hain

हम वस्ल की दिन-रात दुआ माँग रहे हैं

ہم وصل کی دن رات دعا مانگ رہے ہیں

शायर: Naeem Faraz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम वस्ल की दिन-रात दुआ माँग रहे हैं
बीमार-ए-मोहब्बत हैं दवा माँग रहे हैं

मुश्किल से मिला करते हैं बा-ज़र्फ़ मुख़ालिफ़
दुश्मन मिरे जीने की दुआ माँग रहे हैं

इस दर्जा फ़रोज़ाँ हैं मिरे दाग़-ए-जिगर भी
ख़ुर्शीद-ओ-क़मर मुझ से ज़िया माँग रहे हैं

पुर-नूर है जिन से मिरी आँखों का जज़ीरा
औरों से मिरे घर का पता माँग रहे हैं

तुम लोग तमन्नाई हो ख़ुर्शीद-ओ-क़मर के
हम लोग तो छोटा सा दिया माँग रहे हैं

इतना है 'फ़राज़'-ए-दिल-ए-मुज़्तर का फ़साना
मेरे लिए रो कर वो दुआ माँग रहे हैं