उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum sochte hain raat mein taron ko dekh kar

हम सोचते हैं रात में तारों को देख कर

ہم سوچتے ہیں رات میں تاروں کو دیکھ کر (ردیف .. ن)

शायर: Chakbast Braj Narayan4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम सोचते हैं रात में तारों को देख कर
शमएँ ज़मीन की हैं जो दाग़ आसमाँ के हैं

जन्नत में ख़ाक बादा-परस्तों का दिल लगे
नक़्शे नज़र में सोहबत पीर-ए-मुग़ाँ के हैं

अपना मक़ाम शाख़-ए-बुरीदा है बाग़ में
गुल हैं मगर सताए हुए बाग़बाँ के हैं

इक सिलसिला हवस का है इंसाँ की ज़िंदगी
इस एक मुश्त-ए-ख़ाक को ग़म दो-जहाँ के हैं