उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne aankh se dekha kitne suraj nikle Dub gae

हम ने आँख से देखा कितने सूरज निकले डूब गए

ہم نے آنکھ سے دیکھا کتنے سورج نکلے ڈوب گئے

शायर: Ejaz Obaid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने आँख से देखा कितने सूरज निकले डूब गए
लेकिन तारों से पूछो कब निकले चमके डूब गए

दो साए पहले आकाश तले साहिल पर बैठे थे
लहरों ने लिपटाना चाहा और बेचारे डूब गए

पेड़ों पर जो नाम लिखे थे वो तो अब भी बाक़ी हैं
लेकिन जितने भी तालाब में पत्थर फेंके डूब गए

ऊँचे घर आकाश छुपा कर अपने आप पे नाज़ाँ हैं
चारों ओर खुले आकाश के सूरज पीछे डूब गए

अब तो हमें इक शे'र का होना भी ना-मुम्किन लगता है
अब तो दिन की नीली झील में रात के तारे डूब गए