उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ham-nafas kya kahun kya kya shab-e-hijran dekha

हम-नफ़स क्या कहूँ क्या क्या शब-ए-हिज्राँ देखा

ہم نفس کیا کہوں کیا کیا شب ہجراں دیکھا

शायर: Raft Bahraichi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम-नफ़स क्या कहूँ क्या क्या शब-ए-हिज्राँ देखा
मौत तो देखी नहीं मौत का सामाँ देखा

दिल के हर दाग़-ए-मोहब्बत को फ़रोज़ाँ देखा
हम ने घर बैठे हुए लुत्फ़-ए-चराग़ाँ देखा

का'बा-ओ-दैर गए ढूँडने ना-फ़हमी थी
उन को देखा भी तो नज़दीक-ए-रग-ए-जाँ देखा

नाले बेज़ार असर से हैं असर नाले से
दोस्त को दोस्त का दुश्मन शब-ए-हिज्राँ देखा

वो दिल-ए-ज़ार हो मेरा कि हो शम’-ए-सोज़ाँ
जिस को देखा तिरी महफ़िल में परेशाँ देखा

फिर बहार आई ख़िज़ाँ-दीदा चमन में सद-शुक्र
आज फिर 'राफ़त'-ए-महज़ूँ को ग़ज़ल-ख़्वाँ देखा