उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum KHuda the na KHudai apni

हम ख़ुदा थे न ख़ुदाई अपनी

ہم خدا تھے نہ خدائی اپنی

शायर: Parveen Kaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ख़ुदा थे न ख़ुदाई अपनी
क्या बयाँ करते बड़ाई अपनी

बस तिरा ध्यान मुझे आया था
फिर कभी याद न आई अपनी

सब पहुँच में हैं मगर क्या कहिए
किस के दिल तक है रसाई अपनी

दिल में लाए तिरे ख़्वाबों का ख़याल
हम ने ख़ुद नींद उड़ाई अपनी

तुम ये कह दो चलो हम हार गए
ख़त्म की मैं ने लड़ाई अपनी

कौन समझेगा ये आँसू हैं गुहर
क्यों लुटाते हो कमाई अपनी