उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum jo khiDki pe parda Dalte hain

हम जो खिड़की पे पर्दा डालते हैं

ہم جو کھڑکی پہ پردہ ڈالتے ہیں

शायर: Vikram Sharma4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम जो खिड़की पे पर्दा डालते हैं
धूप से रौशनी निकालते हैं

दोनों लोगों को ये मुग़ालते हैं
बिगड़ी बातों को हम सँभालते हैं

हम को हर रोज़ इतनी फ़ुर्सत है
हम कि हर काम कल पे टालते हैं

पहले करते हैं मशवरे सब से
और फिर सिक्के को उछालते हैं