उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hairan na ho dekh main kya dekh raha hun

हैरान न हो देख मैं क्या देख रहा हूँ

حیران نہ ہو دیکھ میں کیا دیکھ رہا ہوں

शायर: Hafeez Jalandhari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैरान न हो देख मैं क्या देख रहा हूँ
बंदे तिरी सूरत में ख़ुदा देख रहा हूँ

वो अपनी जफ़ाओं का असर देख रहे हैं
मैं मअनी-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा देख रहा हूँ

दुज़्दीदा निगाहों से किधर देख रहे हो
क्या बात है ये आज मैं क्या देख रहा हूँ

है हुस्न यही शय तो गुमाँ और न कीजे
सौदा नहीं मतलूब ज़रा देख रहा हूँ

किस तरह न क़ाइल हूँ दुआ-ए-सहरी का
उस लब पे तबस्सुम की ज़िया देख रहा हूँ

क्यूँ अर्ज़-ए-वतन तंग है ये बात ही क्या है
अब तो फ़क़त इक क़ब्र की जा देख रहा हूँ

मर जाने की धमकी हुई तम्हीद-ए-तमाशा
मैं ने कहा देख उस ने कहा देख रहा हूँ