उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hai azal ki is ghalat baKHshi pe hairani mujhe

है अज़ल की इस ग़लत बख़्शी पे हैरानी मुझे

ہے ازل کی اس غلط بخشی پہ حیرانی مجھے

शायर: Hafeez Jalandhari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

है अज़ल की इस ग़लत बख़्शी पे हैरानी मुझे
इश्क़ ला-फ़ानी मिला है ज़िंदगी फ़ानी मुझे

मैं वो बस्ती हूँ कि याद-ए-रफ़्तगाँ के भेस में
देखने आती है अब मेरी ही वीरानी मुझे

थी यही तम्हीद मेरे मातमी अंजाम की
फूल हँसते हैं तो होती है पशीमानी मुझे

हुस्न बे-पर्दा हुआ जाता है या रब क्या करूँ
अब तो करनी ही पड़ी दिल की निगहबानी मुझे

बाँध कर रोज़-ए-अज़ल शीराज़ा-ए-मर्ग-ओ-हयात
सौंप दी गोया दो आलम की परेशानी मुझे

पूछता फिरता था दानाओं से उल्फ़त के रुमूज़
याद अब रह रह के आती है वो नादानी मुझे