उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haal apna main sunata kaise

हाल अपना मैं सुनाता कैसे

حال اپنا میں سناتا کیسے

शायर: Umais Ahmar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाल अपना मैं सुनाता कैसे
दाग़ दिल के मैं दिखाता कैसे

'ऐब ही 'ऐब थे मेरे अंदर
मैं भला रास भी आता कैसे

जुर्म सारे ही मिरे हक़ में थे
और हक़ीक़त मैं सुनाता कैसे

पहले ही बोझ है मुझ में इक शख़्स
इक मैं और बोझ उठाता कैसे

इक खिलौना है मिरा उस के पास
अब के मैं 'ईद मनाता कैसे

एक ग़ुब्बारा बिका भी नहीं है
फिर मैं घर लौट के जाता कैसे

उस की आँखों में जो डूबे 'अहमर'
उन को तैराक बचाता कैसे