उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bu-e-gul se hai pareshan titli

बू-ए-गुल से है परेशाँ तितली

بوئے گل سے ہے پریشاں تتلی

शायर: Umais Ahmar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बू-ए-गुल से है परेशाँ तितली
पर लगे है कि है रक़्साँ तितली

तुझ को गुल जान के लौट आती है
तेरी तस्वीर पे जानाँ तितली

उस को सूरज की किरन बार लगे
इस नज़ाकत पे है हैराँ तितली

थे निगहबाँ कई जुगनू उस के
क्यों न फिर होती फ़रोज़ाँ तितली

मुस्कुराते हैं तिरी आमद पर
गुल भी ग़ुंचा भी गुलिस्ताँ तितली