उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghurur-e-jalwa-e-irfan hai dekhiye kya ho

ग़ुरूर-ए-जल्वा-ए-इरफ़ाँ है देखिए क्या हो

غرور جلوۂ عرفاں ہے دیکھیے کیا ہو

शायर: Ghaus Mohammad Ghausi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ुरूर-ए-जल्वा-ए-इरफ़ाँ है देखिए क्या हो
बड़े अँधेरे में इंसाँ है देखिए क्या हो

चले हैं तोड़ने ज़िंदाँ को चंद दीवाने
सवाल-ए-अज़्मत-ए-ज़िंदाँ है देखिए क्या हो

क़रीब-ए-शादी-ए-मर्ग आ चला है दीवाना
नक़ाब सिलसिला-जुम्बाँ है देखिए क्या हो

सदाक़तें भी हैं अब इत्तिहाम की ज़द पर
बशर बशर से गुरेज़ाँ है देखिए क्या हो

हवाएँ रुख़ तो बदलने लगी हैं ऐ 'ग़ौसी'
शबाब-ए-जश्न-ए-चराग़ाँ है देखिए क्या हो