उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghunT pani ke sondhe sondhe the

घूँट पानी के सोंधे सोंधे थे

گھونٹ پانی کے سوندھے سوندھے تھے

शायर: Parveen Kaif5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घूँट पानी के सोंधे सोंधे थे
जब वो मिट्टी के आब-ख़ोरे थे

आँच भी ख़ुश-गवार देते थे
कल जो वो धीमे धीमे चूल्हे थे

डाल से कैरियाँ जो गिरती थीं
पाल में कच्चे आम पकते थे

सर उठा कर इमारतों ने कहा
वो कोई घर थे या घरौंदे थे

हाए 'परवीन' ये जदीद फ़्लैट
इन से अच्छे तो कल के दड़बे थे