उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar mein aaram ka saya nahin rahne deti

घर में आराम का साया नहीं रहने देती

گھر میں آرام کا سایہ نہیں رہنے دیتی

शायर: Aalam Nizami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर में आराम का साया नहीं रहने देती
अब तो तन्हाई भी तन्हा नहीं रहने देती

मुफ़लिसी कितनी ख़तरनाक है तुम क्या जानो
ये सलामत कोई रिश्ता नहीं रहने देती

ये तो अच्छा हुआ साँसों पे नहीं बस उस का
वर्ना दुनिया मुझे ज़िंदा नहीं रहने देती

चाहती क्या है ये आवारा-मिज़ाजी मेरी
एक मरकज़ पे हमेशा नहीं रहने देती

क्या बुरी शय है ये शोहरत की हवस भी 'आलम'
अच्छे-अच्छों को भी अच्छा नहीं रहने देती